Tuesday, 6 March 2018

मोबाइल पर गंदी फिल्में देखता रहता था बेटा, कसाई बाप ने गुस्से में हाथ ही काट दिया


तेलंगाना से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है. एक पिता ने अपने बेटे का हाथ काट दिया. दरअसल वह इस बात से नाराज और गुस्सा था कि लड़का मोबाइल पर गंदी फिल्में देखता रहता था.

तेलंगाना से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है. एक पिता ने अपने बेटे का हाथ काट दिया. दरअसल वह इस बात से नाराज और गुस्सा था कि लड़का मोबाइल पर गंदी फिल्में देखता रहता था. पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी पिता कय्यूम कुरैशी पेशे से कसाई है.

कुरैशी अपने बेटे की अपने काम और स्वास्थ्य को ताक में रखकर फिल्म और पोर्न देखने की आदत से खफा था. पुलिस ने बताया कि हाथ कलाई से थोड़ा ऊपर से काटा गया है, जिसके फिर से सही हालत में आने की उम्मीद न के बराबर है.

पहाड़ी शरीफ थाने के निरीक्षक पी लक्ष्मीकांत रेड्डी ने बताया कि कुरैशी ने कल रात अपने 18 साल के बेटे का दायां हाथ कलाई से काट दिया. पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़ित केबल ऑपरेटर का काम करता है और उसने हाल में स्मार्ट फोन खरीदा था. वह मोबाइल पर फिल्में देखता रहता था. उसके पिता ने इसे लेकर उसे कई बार चेतावनी भी दी थी.

पिता- पुत्र की दो दिन पहले इसी बात पर तीखी बहस हुई थी. बहस के दौरान बेटे ने कथित रूप से कुरैशी को काट लिया था. पुलिस निरीक्षक ने बताया कि कल रात जब उसका बेटा सो रहा था तब कुरैशी ने उसका दायां हाथ छुरी से काट दिया.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़ित की मां ने पुलिस में आज शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने कुरैशी को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत गिरफ्तार किया है. उन्होंने बताया कि बेटे का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर है.

श्रीलंका में क्यों लगाई गई है इमरजेंसी


श्रीलंका में 10 दिनों के लिए इमरजेंसी लगा दी गई है. इसकी वजह है सिंहली और मुस्लिम समुदाय के बीच जारी संघर्ष. अगर श्रीलंका में यह हालात जारी रहे तो आने वाले वक्त में भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है.



श्रीलंका में 10 दिनों के लिए इमरजेंसी लगा दी गई है. इसकी वजह है सिंहली और मुस्लिम समुदाय के बीच जारी संघर्ष. भारतीय क्रिकेट टीम इन मुश्किल हालातों में भी वहां खेल रही है. माना जा रहा है कि अगर श्रीलंका में यह हालात जारी रहे तो आने वाले वक्त में भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है.

सिंहलियों के विरोध प्रदर्शन के बाद हिंसा रोकने के लिए श्रीलंका की सरकार ने कैंडी में कर्फ्यू लगा दिया है. श्रीलंका में सिंहली समुदाय और मुस्लिम समुदाय के बीच लंबे वक्त से तनाव जारी है. श्रीलंका में बहुसंख्यक आबादी सिंहली समुदाय के लोगों की है जो बौद्ध धर्म को मानते हैं जबकि श्रीलंका में मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक हैं.

- 2.1 करोड़ आबादी वाले देश में सिंहली समुदाय के लोगों की संख्या 75 फीसदी है
- श्रीलंका में हिंदू आबादी 13 फीसदी है जबकि मुस्लिम समुदाय की आबादी 10 फीसदी है
- बौद्ध बहुल सिंहली समुदाय मुस्लिम समुदाय पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाता है
- वहीं मुस्लिम समुदाय खुद को धार्मिक उत्पीड़न का शिकार बताता है
- सिंहली समुदाय का मुस्लिमों पर बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है.

भारत पर पड़ सकता है असर

पडोसी देश श्रीलंका में जो समस्या पैदा हुई है जानकारों की राय में उससे भारत भी अछूता नहीं रह सकता. कुछ दूसरे देश इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं. माना जा रहा है कि अगर जल्द हालात नहीं सुधरे तो भारत को शरणार्थियों की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है. म्यांमार में जब दो गुटों के बीच हिंसा हुई तो भारत में बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी दाखिल हो गए.

कुल 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी भारत में दाखिल हो चुके हैं. जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, एनसीआर, हरियाणा और राजस्थान में रोहिंग्या शरणार्थियों ने शरण ली है. इसी वजह से अब ये सवाल उठ रहे हैं कि अगर श्रीलंका में भी हालात नहीं सुधरे तो क्या वहां के अल्पसंख्यक मुस्लिम भारत का रुख करेंगे. इसके अलावा चिंता इस बात की भी है कि कुछ दूसरे देश भी हालात का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं.

जानकारों के मुताबिक पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता से भारत को खतरा हो सकता है. कई दूसरे देश मदद के बहाने श्रीलंका के करीब आ सकते हैं और चीन, पाकिस्तान, सऊदी अरब जैसे देशों को मौका मिल सकता है. गौरतलब है कि म्यांमार को भी चीन ने मदद का ऑफर दिया था. ऐसे में कई जानकारों की राय है कि भारत, श्रीलंका में पैदा हुई इस समस्या के समाधान के लिए पहल करे.